तन्हाई और शायरी
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Hii doston aapke liye new shayari 💕 2026 official Arun blog mai aapke liye milti rahegi.
रूढ़ तो हम भी जाए, लेकिन मनाने वाला कोई नहीं है।
मैं आंसू की एक बूंद भी क्यों गिरने दूं, लेकिन पूछने वाला कोई नहीं है।
ऐ जिंदगी कितने जख्म देगी,इन ज़ख्मों को भरने वाला कोई नहीं है।
शायरी का अर्थ:
रूठ तो हम भी जाएं: मैं भी रूठ सकता/सकती हूँ।
लेकिन मनाने वाला कोई नहीं है: लेकिन मुझे मनाने वाला कोई नहीं है।
मैं आंसू एक बूंद भी क्यों गिरने दूँ जब पोंछने वाला नहीं है: मैं आंसू की एक बूंद भी क्यों गिराऊं जब उसे पोंछने वाला ही कोई नहीं है?
ऐ जिंदगी कितने जख्म देगी जब इन जख्मों को भरने वाला कोई नहीं है: ऐ जिंदगी, तू मुझे और कितने जख्म देगी जब इन जख्मों को भरने वाला कोई नहीं है?
एक गहरा और दिल को छू लेने वाला शेर जो अकेलेपन, उदासी और ज़िंदगी के संघर्षों को बयां करता है। अगर आप भी तन्हाई महसूस कर रहे हैं, तो ये पंक्तियाँ आपके दिल की बात कहेंगी।
आपको शायरी पसंद आई हो तो हमें कॉमेंट करें ऑफियल अरुण ब्लॉग पर धन्यवाद।
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